खतरा अभी बरकरार है

विश्व कोरोना से जंग लड़ रहा है। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। लोग एक के बाद एक मौत के मुंह में समा रहे हैं। इस बीच कई घटनाएं सामने आई, जिनके आधार पर कई लोगों ने साल 2020 को दुनिया खत्म होने वाला साल करार भी दिया। वैसे संसार में किसी ने सोचा भी नहीं होगा, कि ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे, जब लोग अपने ही घरों में रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे। आसमान की ऊंचाइयों को नापने का सपना ऐसा टूटेगा कि लोग अपनों से भी नहीं मिल पाएंगे। घर लौटने की राह देखते-देखते घर में ही बंद हो जाएंगे। घर से बाहर निकलना यानी मौत को आमंत्रण देना हो जाएगा। पर्यावरण शुद्ध हो जाएगा, लेकिन चैन की सांस नहीं ले पाएंगे। बहरहाल, दुनिया के कई शोधकर्ता हर रोज महामारी की काट खोजने के लिए हजारों प्रयास, उपचार व वैक्सीन पर तेज गति से शोध कर रहे है। लेकिन अभी तक कोई भी दवा इस वायरस का खात्मा नहीं कर पाई है। परन्तु रूस के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें एक ऐसा प्रमाण मिला है जिससे कोविड-19 मरीजों को बचाया जा सकता है। और अब दुनिया को कोरोना वायरस की पहली वैक्‍सीन भी अगस्‍त महीने में ही मिलेगी यह दावा रूस कर रहा है, जिस पर कई देश उस वैक्सीन पर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि, अभी तक
कोरोना की पुरानी किस्म ही काबू में नहीं आ रही थी कि अब वायरस ने खुद को ही बदल लिया है। जिसके बाद से अब कोरोना का खतरा ओर दस गुना बढ़ गया है। दरअसल, मलेशिया में कोरोना के कुछ अजीबो-गरीब केस सामने आए हैं। जिसकी वजह से वहां लोगों को बेहद सतर्क रहने की चेतावनी भी दे दी गई है। वहां कोरोना वायरस ने खुद को म्यूटेट कर लिया है, यानी अपनी जीन संरचना में बदलाव कर लिया है और उसका यह बदलाव मनुष्यों के लिए ज्यादा घातक साबित हो सकता है। व मलेशिया में तो कोरोना की यह नई किस्म पहले से दस गुना ज्यादा घातक होने के प्रमाण भी दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि, कोरोना वायरस में हुए इस नए तरह के बदलाव के बाद कोरोना का प्रसार दस गुना तेजी से हो सकता है। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक नूर हिशाम ने इस खतरे के बारे में जानकारी भक दी है कि, यह कोरोना वायरस के म्यूटेशन में बदलाव की बात वैज्ञानिक रूप से साबित होने के बाद तो आम लोगों को ओर ज्यादा सतर्क रहना पड़ेगा। एंव कोरोना के इस नए बदलाव यानी म्यूटेशन का नाम डी सिक्स फोर्टीन जी रखा गया है। तथा मलेशिया में कोरोना वायरस का यह नया रूप ओर ज्यादा घातक स्वरुप एक साथ 45 लोगों में देखा गया है। जिसके बारे में शोध करने के बाद मलेशिया के वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना का यह नया म्यूटेशन डी सिक्स फोर्टीन जी पहले से दस गुना ज्यादा घातक है। और इस वायरस के संक्रमण की शुरुआत एक रेस्टोरेन्ट मालिक से हुई थी। जिसे इस नए तरह के कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का जिम्मेदार भी माना जा रहा है व इस शख्स को 5 महीने के जेल की सजा भी दी गई है। एंव इसके अलावा उसपर जुर्माना भी लगाया गया है। बहरहाल, ड़ब्लूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन मलेशिया के अधिकारियों के दावे की जांच में जुटा हुआ है। व अब तक की जानकारी के बाद से यह पता लगा है, कि कोरोना में इस नए तरह के म्यूटेशन की शुरुआत जुलाई से ही हो गई थी। लेकिन ड़ब्लूएचओ के अधिकारियों के मुताबिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च की जांच में पाया गया है कि, कोरोना में म्यूटेशन की अभी शुरुआत ही हुई है और यह कितना घातक साबित हो सकता है, इसपर और रिसर्च की भी जरुरत है।तथा उन्होंने इस मामले में तत्काल प्रभाव से वैसे तो कोई चेतावनी जाहिर करने से इनकार किया है। परंतु चिंतापूर्ण विषय यह है कि, विश्व अभी तक कोरोना महामारी से ही नहीं उभर पाया है इतनी टेक्नोलॉजी होने के बावजूद भी अगर कोई देश कोरोना का खात्मा नहीं कर पाया है तो उस से दस गुना ज्यादा ताकतवर वायरस से देश कैसे लड़ेगा।

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