प्यार के पत्तों की किताब

 प्यार के पत्तों से भरी किताब हो तुम,

रिश्तो की फूलों में गुलाब हो तुम,

 कुछ लोग कहते हैं प्यार सच्चा नहीं होता,

उन लोगों के हर सवाल का जवाब हो तुम,

हाथ पकड़ा बात की फिर गले लगा लिया,

एक साथ ही तीन झटके आए हाय!

 तुझको निकाल कर देखा है,

 मेरे अंदर कुछ नहीं बचता,

 गर सुकून चाहिए इस लमहाय मौजूद में भी,

आओ इस लमहाय मौजूद से बाहर निकले,

उंगलियां फिर मेरे बालों में,

 यह मेरा दर्दे सर नहीं जाता,

कांप उठती हूं मैं  यह सोचकर तनहाई में,

मेरे चेहरे पर तेरा नाम ना पढ़ ले कोई..

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Comments
VIVEK A - Jul 31, 2020, 10:46 PM - Add Reply

Good

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